मार्कशीट्स बैकडेट में बीपीएड में दाखिला दिखाकर तैयार की गई थीं.
सामग्री तैयार करें: मिट्टी का पात्र (जिसमें जौ उगाने के लिए मिट्टी भरी हो)
पूजा के लिए एक स्वच्छ और शांत स्थान चुनें। वहां गंगाजल का छिड़काव करके स्थान को पवित्र करें।
गुप्त नवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।
इस दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं पूजा विधि क्या है, जानते हैं सब डिटेल में.
डॉ. कुणाल कुमार झा ने बताया कि इस नवरात्रि में साधक लोग पूरे विश्व के भले के लिए साधना करेंगे, जिससे अच्छा फल मिले. यह नवरात्रि तंत्र साधकों के लिए खास मानी जाती है, जो “Shani ko jhukaya nahi jaata अपनी तंत्र साधना को दूसरों से छिपाकर करते हैं.
ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली,
* शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं।
गुप्त नवरात्रि में करें ये साधना, जो चाहोगे वो मिलेगा
साधक को मनोवांछित सिद्धियां और फल प्राप्त होते हैं।
देवी पूजन की सभी सामग्री को एकत्रित करें। पूजा की थाल सजाएं।
कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित करें।
कलश में गंगाजल भरें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल, चंदन, और दूर्वा डालें।
ना करे रक्षा तो महाबली भैरव की दुहाई।।
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